विस्तृत उत्तर
एकादश रुद्र प्राण-तत्त्व और संहार से जुड़े देव हैं। वामन पुराण, मत्स्य पुराण और रामायण में महर्षि कश्यप और सुरभि अथवा अदिति के संयोग से उत्पन्न ११ रुद्रों का उल्लेख मिलता है। मत्स्य पुराण के अनुसार इनके नाम हैं: कपाली, पिंगल, भीम, विरूपाक्ष, विलोहित, शास्ता, अजपाद, अहिर्बुध्न्य, शम्भु, चण्ड और भव। पितृकर्म में रुद्र उस अवस्था के अधिष्ठाता हैं जहाँ जीवात्मा पार्थिव बंधनों और वसु रूपी स्थूलता से मुक्त होकर सूक्ष्म प्राणिक स्वरूप में ब्रह्माण्ड में गमन करती है।
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