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पितृकर्म प्रश्नोत्तरी — 15 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित पितृकर्म विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 15 प्रश्न

लोक

पुरूरव-आर्द्र विश्वेदेव कौन हैं?

पुरूरव-आर्द्र महालय श्राद्ध में आहूत किए जाने वाले विश्वेदेव हैं, जो पितृ-कर्म के रक्षक माने गए हैं।

पुरूरव आर्द्रविश्वेदेवमहालय श्राद्ध
लोक

पार्वण श्राद्ध में विश्वेदेवों का आह्वान क्यों अनिवार्य है?

विश्वेदेव श्राद्ध के रक्षक और साक्षी हैं; वे पितृभाग को राक्षस-पिशाचों से सुरक्षित रखते हैं।

पार्वण श्राद्धविश्वेदेवपुरूरव आर्द्र
लोक

विश्वेदेव कौन हैं?

विश्वेदेव पितृ-कर्म के रक्षक, साक्षी और मार्गदर्शक देव हैं।

विश्वेदेवश्राद्धपितृकर्म
लोक

प्रपितामह के तर्पण में आदित्यरूप क्यों कहा जाता है?

प्रपितामह तीसरी पीढ़ी और उच्चतम प्रकाशमय पितृ अवस्था है, इसलिए तर्पण में उसे आदित्यरूप कहा जाता है।

प्रपितामह तर्पणआदित्यरूपआदित्य
लोक

पितृकर्म में आदित्यों की भूमिका क्या है?

आदित्य पितृकर्म में प्रपितामह के अधिष्ठाता हैं और ज्ञान, प्रकाश, आध्यात्मिक उन्नति तथा मोक्ष से जुड़े हैं।

आदित्य भूमिकापितृकर्मप्रपितामह
लोक

द्वादश आदित्य कौन हैं?

द्वादश आदित्य कश्यप और अदिति के 12 पुत्र हैं: इन्द्र, धाता, भग, पूषा, मित्र, वरुण, अर्यमा, विवस्वान, सविता, त्वष्टा, विष्णु और अंश।

द्वादश आदित्यआदित्यकश्यप
लोक

पितृकर्म में रुद्रों की भूमिका क्या है?

रुद्र पितृकर्म में पितामह के अधिष्ठाता हैं; वे सूक्ष्म पापों का दहन कर आत्मा को उच्च यात्रा के लिए शुद्ध करते हैं।

रुद्र भूमिकापितृकर्मपितामह
लोक

रुद्रों का प्राण-तत्त्व से क्या संबंध है?

रुद्र सूक्ष्म प्राणिक अवस्था के प्रतीक हैं और मृत आत्मा के सूक्ष्म पापों का दहन कर उसे आगे की यात्रा के लिए शुद्ध करते हैं।

रुद्रप्राण तत्त्वसूक्ष्म अवस्था
लोक

रुद्र शब्द का अर्थ क्या है?

रुद्र का अर्थ है दुःख या पाप को दूर करने वाले, तथा संहार और प्राण-तत्त्व के अधिष्ठाता।

रुद्र अर्थरुद्र शब्दप्राण तत्त्व
लोक

एकादश रुद्र कौन हैं?

एकादश रुद्र ११ प्राणिक और संहार-शक्ति से जुड़े देव हैं: कपाली, पिंगल, भीम, विरूपाक्ष, विलोहित, शास्ता, अजपाद, अहिर्बुध्न्य, शम्भु, चण्ड और भव।

एकादश रुद्ररुद्रप्राण तत्त्व
लोक

पितृकर्म में वसुओं की भूमिका क्या है?

वसु पितृकर्म में प्रथम पीढ़ी यानी पिता के अधिष्ठाता हैं और स्थूल शरीर, भौतिक तत्त्व व वंश-वृद्धि से जुड़े हैं।

वसु भूमिकापितृकर्मश्राद्ध
लोक

पिता को वसु स्वरूप क्यों माना जाता है?

पिता यजमान के भौतिक शरीर का निकटतम कारण है, इसलिए वह वसु स्वरूप प्रथम पितृ माना जाता है।

पिता वसु स्वरूपपितृकर्मवसु
लोक

वसु शब्द का अर्थ क्या है?

वसु का अर्थ है निवास या आश्रय देने वाला; वसु भौतिक तत्त्वों और जगत के धारक देव हैं।

वसु अर्थवसु शब्दयास्काचार्य
लोक

अष्ट वसु कौन हैं?

अष्ट वसु हैं: आप, ध्रुव, सोम, धर, अनिल, अनल, प्रत्यूष और प्रभास।

अष्ट वसुवसुपितृकर्म
श्राद्ध एवं पितृकर्म

श्राद्ध में अर्घ्य देने की विधि क्या है?

श्राद्ध में अर्घ्य (तर्पण) की विधि में दक्षिण मुख, अपसव्य स्थिति में, तांबे-चाँदी के पात्र में जल-तिल-कुश मिलाकर पितरों का नाम-गोत्र लेते हुए जल छोड़ा जाता है। अपराह्न का समय श्रेष्ठ माना गया है।

अर्घ्यश्राद्ध विधितर्पण

विषय-वार प्रश्नोत्तर

🙏पूजा विधि📿मंत्र जाप विधि🔱शिव पूजा🔮तंत्र साधना🏠वास्तु शास्त्र💭सपनों का मतलब🪐ज्योतिष उपाय🙏व्रत उपवास🔥देवी पूजा🧘ध्यान साधना🛕तीर्थ यात्रा🔥हवन यज्ञ📜स्तोत्र पाठ🐘गणेश पूजा🙏विष्णु भक्ति📖सनातन दर्शन🕯️श्राद्ध पितृ कर्म🎗️संस्कार विधि❤️भक्ति साधनाधार्मिक उपाय

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

पौराणिक प्रश्नोत्तरी पर आपको हिंदू धर्म, वेद, पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत, पूजा विधि, व्रत-त्योहार, मंत्र, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत, प्रमाणित उत्तर पढ़ें।