📖
विस्तृत उत्तर
पिता को वसु स्वरूप इसलिए माना जाता है क्योंकि पिता यजमान के भौतिक शरीर का सबसे निकटतम कारण है। वसु भौतिक शरीर, पार्थिव चेतना और प्रकृति के पञ्चमहाभूतों के प्रत्यक्ष धारक माने जाते हैं। देहत्याग के पश्चात जीव की प्रथम पारलौकिक परिणति और उसका स्थूल सानिध्य वसु रूप में ही होता है। चूँकि पिता प्रथम पीढ़ी हैं और यजमान के शरीर तथा वंश से सबसे निकट सम्बन्ध रखते हैं, इसलिए पितृकर्म में पिता को वसुओं के समतुल्य माना गया है।
🔗
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक
इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें
क्या यह उत्तर सहायक था?





