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विस्तृत उत्तर
रुद्र प्राण-तत्त्व के साक्षात प्रतीक हैं। पितृकर्म में रुद्र उस अवस्था के अधिष्ठाता हैं जहाँ जीवात्मा पार्थिव बंधनों और वसु रूपी स्थूलता से मुक्त होकर सूक्ष्म प्राणिक स्वरूप में ब्रह्माण्ड में गमन करती है। रुद्रों का कार्य मृत आत्मा के सूक्ष्म पापों का दहन करना और उसे उच्चतर लोकों की यात्रा के लिए शुद्ध करना है। इसीलिए पितामह अर्थात दादा को रुद्र स्वरूप माना जाता है।
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