विस्तृत उत्तर
श्रीमद्भागवत पुराण के प्रथम स्कन्ध में महाभारत युद्ध के पश्चात शरशय्या पर लेटे भीष्म पितामह के प्राण त्यागने का अत्यंत दिव्य प्रसंग आता है। जब भीष्म पितामह ने उत्तरायण सूर्य की प्रतीक्षा के बाद अपने प्राण भगवान श्रीकृष्ण में लीन किए तो उस समय उनकी महिमा का दर्शन करने के लिए न केवल देवतागण स्वर्लोक से आए बल्कि भुवर्लोक से सिद्ध, चारण और विद्याधर भी वहाँ एकत्रित हुए। जब भीष्म ने देह त्याग किया तब इन भुवर्लोक के निवासियों ने अंतरिक्ष से पुष्पों की भारी वर्षा की। यह प्रसंग यह प्रमाणित करता है कि भुवर्लोक के निवासी भूलोक पर घटित होने वाली महान घटनाओं पर निरंतर दृष्टि रखते हैं।
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