विस्तृत उत्तर
विष्णु पुराण के द्वितीय अंश के सातवें अध्याय में महर्षि पराशर मैत्रेय जी के प्रश्नों का उत्तर देते हुए भुवर्लोक के विस्तार का वर्णन करते हैं। वे कहते हैं — 'जितना पृथिवीका विस्तार और परिमण्डल (घेरा) है उतना हि विस्तार और परिमण्डल भुवलोंकका भी हैं।' इस श्लोक का अर्थ यह है कि भुवर्लोक का क्षैतिज विस्तार (horizontal expansion) बिल्कुल भूलोक के ही समान है। यह ब्रह्मांड की एक बेलनाकार या स्तंभ रूपी संरचना की ओर संकेत करता है जहाँ प्रत्येक लोक एक के ऊपर एक समान घेरे में स्थित है। परंतु इसका ऊर्ध्वाधर (vertical) विस्तार पृथ्वी के वायुमंडल के ऊपर से सूर्यमंडल के नीचे तक होता है और यह एक लाख योजन (लगभग आठ लाख मील) है।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक





