विस्तृत उत्तर
जिस प्रकार भूलोक के प्रमुख अधिष्ठाता देव अग्नि हैं और स्वर्लोक के अधिपति देवराज इंद्र व सूर्य हैं उसी प्रकार भुवर्लोक (अंतरिक्ष) के अधिपति और प्रशासक वायु देव (पवन देव) हैं। वायु देव को वेदों और उपनिषदों में 'प्राण' अर्थात विश्व की जीवन-शक्ति के रूप में पूजा गया है। चूंकि भुवर्लोक मुख्य रूप से वायु-तत्व का क्षेत्र है इसलिए इस पूरे लोक का संतुलन, संचालन और यहाँ की सूक्ष्म सत्ताओं का नियंत्रण साक्षात वायु देव के ही अधीन होता है। वायु देव भुवर्लोक में केवल तूफानों या हवा के झोंकों का संचालन ही नहीं करते बल्कि वे ब्रह्मांडीय संवाहक भी हैं। भूलोक में यज्ञ कुंड से उठने वाले धुएं और हविष्य को वायु ही स्वर्लोक के देवताओं तक पहुंचाती है।
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