विस्तृत उत्तर
विष्णु पुराण और मार्कण्डेय पुराण के अनुसार ब्रह्मांड के प्रथम तीन लोक — भूलोक, भुवर्लोक और स्वर्लोक — 'कृतक त्रैलोक्य' कहलाते हैं। 'कृतक' का अर्थ है वह जो उत्पन्न हुआ है और जो विनाशी है। इसका तात्पर्य यह है कि ब्रह्मा जी के एक दिन (कल्प) के अंत में होने वाले नैमित्तिक प्रलय के समय ये तीनों लोक पूरी तरह से नष्ट हो जाते हैं। इसके विपरीत महर्लोक आदि उच्च लोक 'अकृतक लोक' कहलाते हैं जो इस विनाश से आंशिक रूप से ही प्रभावित होते हैं या सुरक्षित रहते हैं। अतः भुवर्लोक भौतिक सृष्टि के उस हिस्से में आता है जो निरंतर निर्माण और विनाश के चक्र के अधीन रहता है।
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