विस्तृत उत्तर
मरुत गण वायु देव के सहायक और अनुचर देवता हैं जिनकी संख्या उनंचास (49) बताई गई है। भुवर्लोक में बादलों का निर्माण, उनका संचलन और पृथ्वी पर वर्षा कराने वाले बादलों को दिशा प्रदान करने का कार्य वायु देव और उनके सहायक इन्हीं उनंचास मरुत-गणों के द्वारा इसी लोक से संपादित होता है। वायु पुराण और वेदांत दर्शन में भुवर्लोक को प्रज्ञा और प्राण का समन्वय माना गया है और इसी कारण मरुत गण इस लोक की वायुमंडलीय व्यवस्था के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मरुत गण वेदों में स्तुत देवता हैं और इंद्र के साथ मिलकर वर्षा और तूफानों का संचालन करते हैं।
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