विस्तृत उत्तर
श्रीमद्भागवत पुराण (३.२०.४४ और ४.२२.४८) के अनुसार सिद्धलोक के निवासियों को एक ग्रह से दूसरे ग्रह तक जाने के लिए किसी भी यांत्रिक विमान (हवाई जहाज आदि) की आवश्यकता नहीं होती। वे अपनी स्वाभाविक योग-शक्ति और अंतर्धान विद्या के बल पर ही अंतरिक्ष में निर्बाध रूप से विचरण कर सकते हैं। सिद्धगण वे महान आत्माएं हैं जो जन्म से ही अष्ट-सिद्धियों से युक्त होते हैं जिनमें अणिमा (अत्यंत सूक्ष्म हो जाना), महिमा (विशाल रूप धारण करना), लघिमा (अत्यंत हल्का हो जाना), प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व, वशित्व और कामावसायिता शामिल हैं। इन्हीं सिद्धियों के बल पर वे बिना किसी भौतिक वाहन के अंतरिक्ष में विचरण करते हैं।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक





