विस्तृत उत्तर
भुवर्लोक किसी एक प्रकार के जीवों का निवास स्थान नहीं है बल्कि यहाँ चेतना और कर्म के विभिन्न स्तरों वाली कई सूक्ष्म और अर्ध-दैवीय सत्ताएं निवास करती हैं। शास्त्रों के अनुसार इस लोक को मुख्य रूप से दो भागों में विभाजित किया जा सकता है। ऊपरी भुवर्लोक में सिद्ध, चारण और विद्याधर निवास करते हैं जो सात्त्विक और रजोगुणी स्वभाव के होते हैं। निचले भुवर्लोक में यक्ष, राक्षस, पिशाच, भूत और प्रेत विचरण करते हैं। श्रीमद्भागवत पुराण के एकादश स्कन्ध में भगवान श्रीकृष्ण उद्धव को बताते हैं कि भुवर्लोक भूत-प्रेतों तथा सूक्ष्म सत्ताओं के निवास के लिए निर्धारित किया गया है।
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