विस्तृत उत्तर
जो लोग सात्विक प्रवृत्ति के होते हैं और जिन्होंने जीवन में दान, पुण्य और यज्ञानुष्ठान किए हैं वे मृत्यु के पश्चात अपने सूक्ष्म शरीर से इसी भुवर्लोक से होते हुए बड़ी सरलता से स्वर्लोक या पितृलोक की ओर प्रस्थान करते हैं। ऐसे पुण्यात्माओं के लिए भुवर्लोक कोई कष्टकारी स्थान नहीं है बल्कि यह एक पारदर्शी मार्ग के समान है। इन आत्माओं को भुवर्लोक में रुकना नहीं पड़ता बल्कि वे आसानी से इस लोक को पार करके अपने गंतव्य तक पहुँच जाती हैं। इसके अतिरिक्त जो साधक योग-मार्ग पर हैं परंतु जिन्हें पूर्ण वैराग्य और आत्म-ज्ञान प्राप्त नहीं हुआ है वे अपनी योग-सिद्धियों के फलस्वरूप मृत्यु के बाद भुवर्लोक के सर्वोच्च स्तर अर्थात सिद्धलोक में जन्म लेते हैं।
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