विस्तृत उत्तर
भुवर्लोक में रहने वाले राक्षस और पाताल (रसातल आदि) निवासी असुरों (दैत्यों और दानवों) में एक मौलिक अंतर है। भुवर्लोक के राक्षस वायुमंडलीय राक्षस हैं जो रात के समय अंधकार में अधिक बलवान हो जाते हैं और अंतरिक्ष में विचरण करते हैं। ये अपनी प्रकृति में सूक्ष्म और वायव्य होते हैं। दूसरी ओर पाताल के असुर अर्थात दैत्य और दानव भूमि के नीचे के अधोलोकों में निवास करते हैं और प्रकृति में अधिक स्थूल और भूमि-तत्व से जुड़े होते हैं। इस प्रकार दोनों की शक्ति का स्रोत और निवास स्थान भिन्न होते हुए भी दोनों तामसिक प्रवृत्ति के हैं।
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