ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण

पितामह प्रश्नोत्तरी — 12 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित पितामह विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 12 प्रश्न

शिव तत्त्व

सदाशिव सर्वात्मक क्यों कहे गए हैं?

सदाशिव भव, विष्णु, ब्रह्मा आदि रूपों में स्थित होने और लोकों तथा पितामह के रूप में कहे जाने से सर्वात्मक बताए गए हैं।

सदाशिवसर्वात्मकभव
लोक

दादा-दादी का तृतीया श्राद्ध कब करें?

दादा-दादी की मृत्यु तृतीया को हो तो उनका श्राद्ध तृतीया को करें।

दादा दादी श्राद्धतृतीया श्राद्धपितामह
लोक

पितामह को रुद्र स्वरूप क्यों माना जाता है?

पितामह दूसरी पीढ़ी के पिण्डभाज पितर हैं और रुद्र स्वरूप माने जाते हैं।

पितामहरुद्र स्वरूपश्राद्ध
लोक

पिण्डभाज् पितर कौन हैं?

पिण्डभाज् पितर पिता, पितामह और प्रपितामह हैं, जिन्हें श्राद्ध में प्रत्यक्ष पूर्ण पिण्ड दिया जाता है।

पिण्डभाज्पितापितामह
लोक

पितामह से 15 अंश कैसे माने गए हैं?

पितामह से १५ अंश मिलते हैं, इसलिए दादा को रुद्र स्वरूप दूसरी पीढ़ी के पितृ के रूप में तर्पित किया जाता है।

पितामह15 अंशरुद्र
लोक

पिता, पितामह और प्रपितामह का देव-मैपिंग कैसे होता है?

देव-मैपिंग में पिता वसु, पितामह रुद्र और प्रपितामह आदित्य रूप में माने जाते हैं।

देव मैपिंगपितापितामह
लोक

रुद्र सूक्ष्म प्राणिक अवस्था के प्रतीक कैसे हैं?

रुद्र स्थूलता से ऊपर उठी प्राणिक अवस्था के प्रतीक हैं, जहाँ आत्मा शुद्ध होकर उच्चतर लोकों की ओर बढ़ती है।

रुद्रसूक्ष्म अवस्थाप्राण
लोक

पितृकर्म में रुद्रों की भूमिका क्या है?

रुद्र पितृकर्म में पितामह के अधिष्ठाता हैं; वे सूक्ष्म पापों का दहन कर आत्मा को उच्च यात्रा के लिए शुद्ध करते हैं।

रुद्र भूमिकापितृकर्मपितामह
लोक

पितामह को रुद्र स्वरूप क्यों माना जाता है?

पितामह दूसरी पीढ़ी है और पितृ यात्रा के सूक्ष्म प्राणिक स्तर का प्रतिनिधि है, इसलिए उसे रुद्र स्वरूप कहा गया है।

पितामहरुद्र स्वरूपदादा
लोक

रुद्रों का प्राण-तत्त्व से क्या संबंध है?

रुद्र सूक्ष्म प्राणिक अवस्था के प्रतीक हैं और मृत आत्मा के सूक्ष्म पापों का दहन कर उसे आगे की यात्रा के लिए शुद्ध करते हैं।

रुद्रप्राण तत्त्वसूक्ष्म अवस्था
दान विधान

तिलधेनु दान का मंत्र क्या है?

तिलधेनु दान मंत्र: 'देवदेव जगन्नाथ प्रीयतां भूर्भुवः स्वः। पिता पितामहः प्रपितामहश्च प्रीयताम्।' अर्थ: हे जगन्नाथ! तीनों लोक प्रसन्न हों। मेरे पिता, पितामह और प्रपितामह प्रसन्न हों।

तिलधेनु दान मंत्रदेवदेव जगन्नाथपितामह
अस्त्र शस्त्र

भीष्म का धनुष कैसा था?

भीष्म का धनुष परशुराम से प्राप्त और अत्यंत शक्तिशाली था। इसकी प्रत्यंचा की आवाज से शत्रु कांप उठते थे। उनके पास ब्रह्मास्त्र सहित अनेक दिव्यास्त्र थे। धनुष का विशेष नाम पुराणों में स्पष्ट नहीं है।

भीष्मभीष्म धनुषमहाभारत

विषय-वार प्रश्नोत्तर

🙏पूजा विधि📿मंत्र जाप विधि🔱शिव पूजा🔮तंत्र साधना🏠वास्तु शास्त्र💭सपनों का मतलब🪐ज्योतिष उपाय🙏व्रत उपवास🔥देवी पूजा🧘ध्यान साधना🛕तीर्थ यात्रा🔥हवन यज्ञ📜स्तोत्र पाठ🐘गणेश पूजा🙏विष्णु भक्ति📖सनातन दर्शन🕯️श्राद्ध पितृ कर्म🎗️संस्कार विधि❤️भक्ति साधनाधार्मिक उपाय

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

पौराणिक प्रश्नोत्तरी पर आपको हिंदू धर्म, वेद, पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत, पूजा विधि, व्रत-त्योहार, मंत्र, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत, प्रमाणित उत्तर पढ़ें।