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विस्तृत उत्तर
पितामह यानी दादा को शास्त्रीय पितृ वर्गीकरण में रुद्र स्वरूप माना गया है। वे दूसरी ऊर्ध्व पीढ़ी के पिण्डभाज पितर हैं और प्रत्यक्ष पिण्ड के अधिकारी हैं। रुद्र स्वरूप पितामह प्राणिक शक्ति, सूक्ष्मता और पितृ मंडल की मध्य अवस्था का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसलिए श्राद्ध में पिता के बाद पितामह को रुद्र रूप से तर्पित किया जाता है।
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