विस्तृत उत्तर
भूत, प्रेत और पिशाच वे सूक्ष्म आत्माएं हैं जो अपने भारी कर्म-बंधनों, अकाल मृत्यु या अत्यधिक भौतिक आसक्ति के कारण स्थूल शरीर खोने के बाद भी पृथ्वी के मोह से मुक्त नहीं हो पातीं। चूँकि उनके पास स्थूल देह नहीं होती अतः वे भूलोक पर सीधे निवास नहीं कर सकते इसलिए वे इसी निचले भुवर्लोक (अंतरिक्ष) में वायु-शरीर (सूक्ष्म शरीर) धारण करके भटकते रहते हैं। ये आत्माएं भूख-प्यास और वासनाओं से पीड़ित रहती हैं क्योंकि सूक्ष्म शरीर में वासना तो होती है परंतु उसे भोगने के लिए स्थूल इंद्रियां नहीं होतीं। श्रीमद्भागवत (५.२४.५) स्पष्ट रूप से बताता है कि ये तामसिक और सूक्ष्म सत्ताएं इसी अंतरिक्ष में निवास करती हैं।
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