विस्तृत उत्तर
भुवर्लोक का वातावरण यज्ञीय ऊर्जाओं का एक अत्यंत महत्वपूर्ण संवाहक है। जब भूलोक में अग्निहोत्र किया जाता है तो उस आहुति का सूक्ष्म तत्व इसी भुवर्लोक से होकर देवताओं तक स्वर्लोक में पहुँचता है। भूलोक में यज्ञ कुंड से उठने वाले धुएं और हविष्य को वायु ही स्वर्लोक के देवताओं तक पहुंचाती है और वायु देव इसी भुवर्लोक के अधिपति हैं। इसलिए भुवर्लोक एक ओर तो मेघों और तूफानों से युक्त है वहीं दूसरी ओर यह मन्त्रों और यज्ञीय हव्य का वहन करने वाला एक अत्यंत पवित्र ब्रह्मांडीय मार्ग भी है। यह लोक उन सूक्ष्म ध्वनियों, शक्तियों और ऊर्जा-तरंगों का संवाहक है जो पृथ्वी पर यज्ञों के दौरान उत्पन्न होती हैं।
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