विस्तृत उत्तर
श्रीमद्भागवत पुराण के पंचम स्कन्ध के अनुसार भुवर्लोक की सीमाएं इस प्रकार हैं। भुवर्लोक की निचली सीमा पृथ्वी के वायुमंडल के ठीक ऊपर से प्रारंभ होती है — वहाँ तक जहाँ तक वायु बहती है और बादल दिखते हैं। इसके ऊपर वायु का प्रवाह समाप्त हो जाता है वहाँ से भुवर्लोक का विस्तार प्रारंभ होता है। भुवर्लोक की ऊपरी सीमा राहु ग्रह के नीचे तक मानी गई है। सूर्यमंडल से दस हजार योजन (अस्सी हजार मील) नीचे राहु का ग्रह स्थित है। राहु से दस हजार योजन नीचे सिद्धलोक, चारणलोक और विद्याधरलोक स्थित हैं जो भुवर्लोक के सबसे ऊपरी क्षेत्र हैं। इस प्रकार भुवर्लोक पृथ्वी के वायुमंडल के तुरंत बाद से प्रारंभ होकर राहु ग्रह के नीचे तक फैला हुआ एक विशाल ब्रह्मांडीय क्षेत्र है जिसमें विभिन्न स्तर और उप-लोक विद्यमान हैं।
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