विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण के अनुसार यदि किसी की अकाल मृत्यु हुई है जैसे आत्महत्या या दुर्घटना तो वह जीवात्मा सीधे स्वर्ग या नरक में नहीं जाती। ऐसी आत्मा 'प्रेत' योनि को प्राप्त होकर निचले भुवर्लोक के घने वायुमंडल में ही फंस जाती है। यहाँ उन्हें तीव्र वायु के झोंकों के बीच बिना किसी आश्रय के रहना पड़ता है। अकाल मृत्यु के कारण इन आत्माओं की नियमित मृत्यु नहीं हो पाती इसलिए वे पूर्ण सूक्ष्म यात्रा नहीं कर पातीं और भुवर्लोक में अटकी रह जाती हैं। इसीलिए सनातन धर्म के गरुड़ पुराण आदि स्मृति ग्रंथों में मृत्यु के उपरांत श्राद्ध और पिंडदान की अनिवार्य व्यवस्था की गई है ताकि वायुमंडल (भुवर्लोक) में भटकी हुई इन प्रेत-आत्माओं को सूक्ष्म ऊर्जा प्राप्त हो सके।
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