विस्तृत उत्तर
चारण वे अर्ध-दैवीय गायक और स्तुति-पाठक हैं जो अंतरिक्ष में विचरण करते हुए देवताओं और भगवान के अवतारों की कीर्ति का गान करते हैं। ये भुवर्लोक के ऊपरी हिस्से में सिद्धों और विद्याधरों के साथ निवास करते हैं। चारण सात्त्विक और रजोगुणी स्वभाव के होते हैं और इनका जीवनकाल मनुष्यों की तुलना में अत्यंत दीर्घ (हजारों वर्ष) होता है। ये सत्ताएं पृथ्वी का स्पर्श नहीं करतीं बल्कि अंतरिक्ष में ही अपना जीवन व्यतीत करती हैं। जब भूलोक पर कोई महान घटना होती है जैसे भीष्म पितामह का देह त्याग तो चारण और अन्य भुवर्लोक के निवासी वहाँ उपस्थित होते हैं और अंतरिक्ष से पुष्पों की वर्षा करते हैं।
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