विस्तृत उत्तर
भुवर्लोक का स्वरूप मुख्य रूप से वायु-तत्व और आकाश-तत्व से निर्मित है। चूंकि भुवर्लोक मुख्य रूप से 'अंतरिक्ष' है इसलिए इसकी भौतिक संरचना भूलोक (पृथ्वी) के समान मिट्टी, जल, अग्नि या चट्टानों से नहीं बनी है। यहाँ पृथ्वी-तत्व (ठोसपन) और जल-तत्व (स्थूल तरल रूप) का लगभग अभाव होता है यद्यपि जल वाष्प (मेघ) के रूप में यहाँ सदैव विद्यमान रहता है। यह लोक न तो पूर्णतः अंधकारमय है और न ही पूर्णतः प्रकाशमान। चूँकि यह सूर्य के ठीक नीचे और पृथ्वी के ऊपर स्थित है इसलिए सूर्य की रश्मियाँ इस लोक से होकर ही पृथ्वी तक पहुंचती हैं। वायु-प्रधान क्षेत्र होने के कारण यहाँ गति सर्वाधिक है।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक





