विस्तृत उत्तर
भीष्म पितामह महाभारत के सबसे वरिष्ठ और भयंकर योद्धा थे और उनके धनुष का वर्णन भी उसी उत्कृष्टता के साथ किया गया है।
महाभारत के भीष्मपर्व में वर्णन मिलता है कि भीष्म का धनुष अत्यंत विशाल और दिव्य था। उनके धनुष की प्रत्यंचा की आवाज इतनी भयंकर थी कि शत्रु सेना थर्रा उठती थी। भीष्म की धनुर्विद्या इतनी उत्कृष्ट थी कि कुरुक्षेत्र के युद्ध के प्रथम 10 दिनों में उनके सेनापतित्व में पांडव सेना बड़ी मात्रा में नष्ट हो रही थी।
भीष्म परशुराम के शिष्य थे — उन्होंने परशुराम से ही धनुर्विद्या और सभी दिव्यास्त्रों का ज्ञान प्राप्त किया था। परशुराम और भीष्म के बीच हुए प्रसिद्ध 23 दिवसीय युद्ध में दोनों बराबर रहे — यह दोनों की शक्ति का प्रमाण था।
भीष्म के पास ब्रह्मास्त्र, प्रस्वापनास्त्र, सम्मोहनास्त्र सहित अनेक दिव्यास्त्र थे जो उन्हें परशुराम से मिले थे। उनके धनुष का विशेष नाम पुराणों में स्पष्ट रूप से नहीं मिलता, परंतु यह परशुराम-प्रदत्त और असाधारण शक्तिशाली था।





