विस्तृत उत्तर
विष्णु पुराण के छठे अंश के तीसरे अध्याय में नैमित्तिक प्रलय का विस्तृत वर्णन मिलता है। जब ब्रह्मा जी का एक कल्प समाप्त होता है तब प्रलयकाल में भगवान विष्णु रुद्र का रूप धारण करते हैं। इस समय सूर्य की सात रश्मियाँ सात अलग-अलग प्रलयंकारी सूर्यों का रूप धारण कर लेती हैं। इन सात सूर्यों की प्रचंड ऊष्मा और ताप के कारण सबसे पहले भूलोक (पृथ्वी) जलकर भस्म हो जाता है। इसके बाद यह भयानक ताप और रुद्र के मुख से निकलने वाली संकर्षण अग्नि ऊपर की ओर उठती है और भुवर्लोक को भी पूरी तरह से अपनी चपेट में ले लेती है जिससे भुवर्लोक का पूरा वायुमंडल और बादल राख में बदल जाते हैं। इसके बाद यह अग्नि स्वर्लोक को भी भस्म कर देती है।
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