विस्तृत उत्तर
अष्ट वसु वे देव हैं जो भौतिक तत्त्वों और चराचर जगत के आधार माने गए हैं। पुराणों के अनुसार दक्ष प्रजापति ने अपनी साठ कन्याओं में से दस का विवाह धर्म के साथ किया, जिनसे वसु उत्पन्न हुए। महाभारत, अग्नि पुराण और मत्स्य पुराण के अनुसार अष्ट वसुओं के नाम हैं: आप, ध्रुव, सोम, धर या पृथ्वी, अनिल, अनल या अग्नि, प्रत्यूष और प्रभास। ये क्रमशः जल, नक्षत्र और अन्तरिक्ष, चन्द्र और वनस्पति, पृथ्वी, वायु, अग्नि, सूर्य या उषा, और आकाश या प्रकाश से सम्बद्ध माने गए हैं। पितृकर्म में पिता को वसु स्वरूप माना जाता है।
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