विस्तृत उत्तर
पार्वण श्राद्ध में विश्वेदेवों का आह्वान अनिवार्य है क्योंकि वे पितरों के रक्षक, साक्षी और मार्गदर्शक हैं। किसी भी पार्वण श्राद्ध में वसु, रुद्र और आदित्य के साथ विश्वेदेवों का आह्वान किया जाता है। उन्हें सर्वप्रथम आमंत्रित ब्राह्मणों में स्थापित कर उनका प्रथम पूजन किया जाता है। इसके बाद पितरों, अर्थात वसु-रुद्र-आदित्य स्वरूप पितरों, को आसन और अर्घ्य दिया जाता है। विश्वेदेव यह सुनिश्चित करते हैं कि श्राद्ध का भाग राक्षसों या पिशाचों द्वारा अपहृत न किया जाए।
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