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विस्तृत उत्तर
प्रपितामह के तर्पण में आदित्यरूप इसलिए कहा जाता है क्योंकि पितृ वर्गीकरण में प्रपितामह, अर्थात परदादा, तृतीय पीढ़ी के पितृ हैं और उन्हें आदित्य स्वरूप माना गया है। आदित्य प्रकाश, काल, ज्ञान और मोक्षोन्मुखी अवस्था के देव हैं। तर्पण में प्रपितामह के लिए कहा जाता है—'अद्येह अमुक गोत्रः अस्मत् प्रपितामहः अमुक शर्मा आदित्यरूपः तृप्यताम् इदं सतिलं जलं तस्मै स्वधा नमः।' यह मन्त्र पितर को उच्चतम प्रकाशमय पितृ अवस्था में स्थापित करता है।
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