विस्तृत उत्तर
काव्या माता वध का प्रसंग कई पुराणिक स्रोतों में मिलता है। मत्स्य पुराण के अध्याय 47 में देवासुर संघर्ष, काव्या माता की शक्ति, विष्णु द्वारा वध और भृगु श्राप का वर्णन मिलता है। पद्म पुराण के ब्रह्म खंड में भी इंद्र का विष्णु के शरीर में छिपना और विष्णु द्वारा काव्या माता का वध बताया गया है। श्रीमद्देवीभागवत पुराण में भी शुक्राचार्य की तपस्या, देवताओं का आक्रमण और काव्या माता के योगबल का प्रसंग आता है। वाल्मीकि रामायण में भी इस घटना का संदर्भ ताड़का वध और राम के सीता-वियोग से जुड़ी व्याख्याओं में मिलता है।
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