विस्तृत उत्तर
रुद्राक्ष भगवान शिव के अश्रुओं से उत्पन्न हुआ है जब उन्होंने हजारों वर्षों की तपस्या के पश्चात अपने नेत्र खोले थे।
यजमान को गले में रुद्राक्ष की माला अवश्य धारण करनी चाहिए क्योंकि यह अनुष्ठान और मंत्रों के घोष से उत्पन्न होने वाले सूक्ष्म स्पंदनों (vibrations) को अवशोषित कर चेतना को ऊर्ध्वगामी बनाता है।
शिव पुराण की विद्येश्वर संहिता (अध्याय २५) के अनुसार विभिन्न मुखी रुद्राक्षों का अपना विशिष्ट फल है:
— एकमुखी: परब्रह्म स्वरूप (ॐ ह्रीं नमः)
— पंचमुखी: कालाग्निरुद्र स्वरूप, समस्त पापों का नाश और मुक्ति (ॐ ह्रीं नमः)
— षष्ठमुखी: कार्तिकेय स्वरूप, ब्रह्महत्या जैसे दोषों से मुक्ति (ॐ ह्रीं हुं नमः)
— चतुर्दशमुखी: परम शिव स्वरूप, सिर पर धारण करने से अमोघ फल (ॐ नमः)





