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शिव अश्रु से जुड़े सभी प्रश्न(5)

शिव अश्रु पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 5 प्रश्न उपलब्ध हैं।

शिव महिमा

रुद्राक्ष की उत्पत्ति कैसे हुई, शिव पुराण के अनुसार?

शिव पुराण के अनुसार भगवान शिव ने दीर्घ तपस्या के बाद जब नेत्र खोले तो उनके नेत्रों से गिरे अश्रु-बिंदुओं से रुद्राक्ष के वृक्ष उत्पन्न हुए। 'रुद्र' (शिव) के 'अक्ष' (नेत्र) से उत्पन्न होने के कारण यह 'रुद्राक्ष' कहलाया और शिव का साक्षात स्वरूप माना गया।

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व्रत-पूर्व तैयारी

रुद्राक्ष का महत्व और उत्पत्ति क्या है?

रुद्राक्ष = शिव के हजारों वर्षों की तपस्या के बाद नेत्र खोलने पर गिरे अश्रुओं से उत्पन्न। मंत्रों के सूक्ष्म स्पंदन अवशोषित कर चेतना ऊर्ध्वगामी बनाता है। एकमुखी = परब्रह्म; पंचमुखी = पाप नाश; चतुर्दशमुखी = परम शिव स्वरूप।

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मंत्र और उपासना

रुद्राक्ष की उत्पत्ति और महिमा क्या है?

रुद्राक्ष की उत्पत्ति: शिव के सहस्रों वर्षों की समाधि के दौरान आंखों के अश्रु से। जितना छोटा उतना फलदायक। खंडित, कीड़े खाया, गोलाई रहित = वर्जित। स्वयं छिद्रित रुद्राक्ष = सर्वोत्तम।

#रुद्राक्ष#शिव अश्रु#फलदायक
जप का स्थान, समय, आसन और माला

महामृत्युंजय जप के लिए कौन सी माला प्रयोग करें?

महामृत्युंजय जप के लिए केवल रुद्राक्ष माला (108 दाने) — रुद्राक्ष शिव का अश्रु है। इसके विद्युत-चुंबकीय और औषधीय गुण हृदय गति नियंत्रित करते हैं और तंत्रिका तंत्र शांत करते हैं।

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गुप्त रुद्राक्ष प्रयोग

क्या रुद्राक्ष केवल एक आध्यात्मिक श्रृंगार की वस्तु है?

नहीं, रुद्राक्ष केवल श्रृंगार नहीं बल्कि शिव से उत्पन्न एक जीवित आध्यात्मिक ऊर्जा उपकरण है।

#आध्यात्मिक उपकरण#शिव अश्रु#रहस्य
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