विस्तृत उत्तर
भगवान शंकर ने पार्वती जी को बताया था कि रुद्राक्ष की उत्पत्ति उनकी आंखों के जल (अश्रु) से हुई है, जब वे सहस्रों वर्षों तक समाधि में थे।
रुद्राक्ष जितना छोटा होता है, वह उतना ही अधिक फलदायक माना जाता है। खंडित, कीड़ों द्वारा खाया हुआ या बिना गोलाई वाला रुद्राक्ष धारण नहीं करना चाहिए। स्वयं छिद्रित रुद्राक्ष सर्वोत्तम है।





