विस्तृत उत्तर
ॐ नमः शिवाय' सनातन धर्म का सबसे पवित्र, शक्तिशाली और प्रसिद्ध पंचाक्षरी मंत्र है। इसकी उत्पत्ति कृष्ण यजुर्वेद की तैत्तिरीय संहिता के 'श्री रुद्रम्' (रुद्राष्टाध्यायी) से हुई है।
नमः शिवाय' का सरल अर्थ है 'भगवान शिव को नमस्कार है'। शिव पुराण की विद्येश्वर संहिता के अनुसार, इस मंत्र के पूर्व लगा प्रणव (ॐ) अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। प्रणव के 'अ', 'उ', और 'म' अक्षरों में ब्रह्मा (सृष्टि), विष्णु (पालन) और रुद्र (संहार) की एकता समाहित है।
शास्त्रों के अनुसार, इस मंत्र का जाप करते समय मन में यह भाव होना चाहिए कि जीव और परब्रह्म में कोई भेद नहीं है। यह पंचाक्षरी मंत्र जीवन के समस्त क्लेशों को दग्ध कर देता है और साधक को परम ज्ञान दृष्टि प्रदान करता है।





