विस्तृत उत्तर
कुक्कुटेश्वर लिंग की पूजा ब्रह्म मुहूर्त (प्रातः 3:30-4:00) में शय्या त्यागकर स्नान के बाद की जाती है।
- 1न्यास: तांत्रिक सुरक्षा के लिए 'ॐ मम शिखायै वषट्', 'ॐ कवचाय हुम्', और 'ॐ अस्त्राय फट्' मंत्रों से न्यास किया जाता है।
- 2ध्यान: शिव के विश्व-रूप का ध्यान करते हुए मंत्र 'ॐ ध्यायेन्नित्यं महेशं रजतगिरिनिभं...' का उच्चारण किया जाता है।
- 3अभिषेक: गंगा जल, पंचामृत और विशेष रूप से काले तिल मिश्रित जल से अभिषेक किया जाता है। अभिषेक के समय रुद्राष्टाध्यायी या पंचाक्षरी मंत्र 'ॐ नमः शिवाय' का जाप किया जाता है।
- 4अर्पण: भगवान को 'ॐ महादेवाय नमः' कहते हुए त्रिदल बिल्वपत्र अर्पित किए जाते हैं।
- 5विसर्जन: पूजा की पूर्णता पर 'स्वस्थाने परमेश्वर मम पूजाम् गृहाण...' मंत्र से विसर्जन कर ऊर्जा को ब्रह्मांडीय स्रोत में समाहित किया जाता है।





