का सरल उत्तर
ब्रह्म मुहूर्त में स्नान के बाद न्यास और 'ॐ ध्यायेन्नित्यं महेशं...' मंत्र से ध्यान किया जाता है। फिर पंचामृत और काले तिल मिश्रित जल से अभिषेक कर 'ॐ नमः शिवाय' का जाप और बिल्वपत्र अर्पण का विधान है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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