विस्तृत उत्तर
शास्त्रों के अनुसार इस शिवलिंग की पूजा 'षोडशोपचार' (16 प्रकार की सेवा) पद्धति से की जाती है। सबसे पहले साधक को भस्म और रुद्राक्ष धारण करना चाहिए। इसके पश्चात शिवलिंग पर दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से 'पंचामृत अभिषेक' किया जाता है। फिर शुद्ध जल से स्नान कराकर भस्म व श्वेत चंदन का लेप किया जाता है। अंत में त्रिगुणाकार बिल्वपत्र और मदार या आक के श्वेत पुष्प अर्पित कर धूप-दीप व आरती की जाती है।





