विस्तृत उत्तर
सोमानंदीश्वर लिंग एक तपस्या-स्थल है, अतः यहाँ सकाम कर्मकांड से अधिक निष्काम आराधना और ध्यान का महत्त्व है। पूजन-विधि अत्यंत सात्त्विक होनी चाहिए:
- 1अभिषेक: सर्वप्रथम संकल्प लेकर शिवलिंग को गंगाजल से नहलाएं। फिर मानसिक शांति के लिए गाय के कच्चे दूध (गोदुग्ध) से अभिषेक करें।
- 2विलेपन व शृंगार: श्वेत चंदन का लेप करें और भस्म से त्रिपुंड लगाएं। शिवलिंग पर त्रिदलाकार बिल्वपत्र उलटा करके तथा मदार या चमेली के श्वेत पुष्प अर्पित करें।
- 3मंत्र जप: रुद्राक्ष की माला पर चंद्र बीज मंत्र 'ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्राय नमः' (पूर्णिमा या सोमवार को) तथा शिव पंचाक्षर मंत्र 'ॐ नमः शिवाय' का अखण्ड जप करें। अंतःकरण शुद्धि के लिए शिव ध्यान मंत्र 'ॐ ध्यायेन्नित्यं महेशं रजतगिरिनिभं...' का प्रयोग करें।
- 4ध्यान: शिवलिंग के सम्मुख सिद्धासन में बैठकर श्वासों पर ध्यान दें (नासाग्र या आज्ञा चक्र पर)। मन के विचारों को दृष्टा भाव से देखें और उन्हें शिव को अर्पित कर दें।





