विस्तृत उत्तर
साधना स्थल पर शुद्ध जल, धूप, दीप और पूजा सामग्री तैयार रखें। पूजन क्रम में वस्त्र समर्पण, आचमन के लिए जल चढ़ाना, भोग (नैवेद्य) लगाना और दीपदान करना शामिल है। आचमन के बाद पुनः जल अर्पित किया जाता है। यह सरल पूजन क्रम साधक को इष्ट देव की कृपा के योग्य बनाता है और साधना को सात्त्विक ऊर्जा से जोड़ता है।





