विस्तृत उत्तर
साधना का आरंभ दृढ़ संकल्प से होना चाहिए। घर के पूजा स्थल पर सीधे हाथ में शुद्ध जल लें। सर्वप्रथम श्री गणेश जी और अपने सद्गुरु जी का ध्यान करें और उनसे साधना की निर्विघ्न समाप्ति के लिए प्रार्थना करें। जल हाथ में लेकर अपना नाम, गोत्र, स्थान और साधना का उद्देश्य (जैसे 'भंडार भरण', 'रोग नाश', या 'शत्रु मुक्ति') स्पष्ट रूप से उच्चारित करते हुए संकल्प लें। संकल्प पूर्ण होने पर जल को भूमि पर छोड़ दें।





