विस्तृत उत्तर
साधना काल (41 दिन) के दौरान प्रतिदिन जप पूर्ण होने के बाद, साधक को शिवलिंग का जल या गाय के दूध से अभिषेक अवश्य करना चाहिए। यह क्रिया अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह साधक को शाबर मार्ग (जो कि शक्ति-केंद्रित है) पर चलते हुए भी वैदिक शुद्धि और सात्त्विकता से जोड़ती है। यह मंत्र की तीव्रता से उत्पन्न होने वाली किसी भी संभावित ऊर्जा असंतुलन को शांत करता है और साधक को शिव की सात्त्विक कृपा का पात्र बनाता है, जिससे मंत्र का तामसिक प्रभाव कल्याणकारी रूप में परिवर्तित हो जाता है।



