विस्तृत उत्तर
साधना की समाप्ति के बाद भगवान शिव से जाने-अनजाने में हुई त्रुटियों, उच्चारण दोषों या विधि में हुई कमी के लिए क्षमा-प्रार्थना करनी चाहिए। साधना पूर्ण होने पर साधक को अपने संकल्प के अनुरूप गरीब या ब्राह्मणों को भोजन कराना चाहिए, या वस्त्र दान (भंडारा) करने का विधान है। यह साधना के प्रति समर्पण और कृतज्ञता का प्रतीक है। नित्य जप जारी रखना मंत्र के प्रभाव को स्थिर रखता है।





