विस्तृत उत्तर
शाबर मंत्र और तांत्रिक मंत्रों में मौलिक अंतर है। शाबर मंत्र क्षेत्रीय बोलियों में होते हैं, गद्यात्मक और सहज होते हैं, और अधिकतर 'स्वयं सिद्ध' होते हैं जिनमें अल्प साधना की आवश्यकता होती है। वहीं तांत्रिक मंत्र शुद्ध संस्कृत में बीज मंत्रों (जैसे ह्रीं, क्रीं) के साथ होते हैं, जिनमें पुरश्चरण, न्यास और विशिष्ट मुद्राओं की अनिवार्य आवश्यकता होती है। शाबर मंत्रों की प्रकृति तीव्र प्रभावशीलता और सीधा शक्ति प्रयोग है, जबकि तांत्रिक साधना शक्ति केंद्रिक होने के साथ-साथ भोग और मोक्ष दोनों पर बल देती है।





