विस्तृत उत्तर
शाबर साधना में सफलता और सुरक्षा के लिए गुरु का मार्गदर्शन अत्यंत आवश्यक माना गया है। शाबर परंपरा में, गुरु के मुख से निकला वचन ही 'ईश्वर वाचा' कहलाता है। गुरु साधना से उत्पन्न होने वाली तीव्र ऊर्जा को नियंत्रित और संतुलित करते हैं। यदि साधक को योग्य और सिद्ध गुरु प्राप्त न हो, तो उसे शाबर मंत्र साधना शुरू करने से पहले अपने इष्ट देव (भगवान शिव) के मूल मंत्र (जैसे 'ॐ नमः शिवाय') का एक पुरस्चरण (सवा लाख जप) पूरा कर लेना चाहिए। यह क्रिया साधक के मन, शरीर और ऊर्जा तंत्र को शाबर मंत्रों की तीव्र ऊर्जा को सहन करने और नियंत्रित करने के लिए तैयार करती है।





