गुरु शिष्य परंपरा परिचयशास्त्रों में गुरु को क्या माना गया है?शास्त्र गुरु को साक्षात ब्रह्मा, विष्णु और महेश के समतुल्य मानता है — गुरु अज्ञान का नाश कर ज्ञान का प्रकाश देते हैं, आध्यात्मिक संभावनाओं की रक्षा करते हैं और ईश्वर का साक्षात्कार कराने वाले पथ-प्रदर्शक हैं।#गुरु महत्व#ब्रह्मा विष्णु महेश#अज्ञान नाश
गुरु की अनिवार्यता'मन्त्र मूलं गुरुर्वाक्यं' का क्या अर्थ है?'मन्त्र मूलं गुरुर्वाक्यं, मोक्ष मूलं गुरु कृपा' का अर्थ: मंत्र का मूल गुरु का वाक्य है और मोक्ष का मूल गुरु की कृपा — गुरु ही मंत्र को चैतन्य करते हैं।
शिव शाबर मंत्रशाबर साधना में गुरु का क्या महत्व है और गुरु न मिलने पर क्या करें?गुरु ऊर्जा को संतुलित करते हैं। गुरु न मिलने पर शिव के मूल मंत्र का सवा लाख जप करना अनिवार्य है।#गुरु महत्व#ईश्वर वाचा#शिव पुरस्चरण