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विस्तृत उत्तर
साधना काल में ब्रह्मचर्य का पालन अनिवार्य है। अश्विनी या वज्र मुद्रा का अभ्यास ब्रह्मचर्य पालन में सहायक माना गया है। यह मुद्राएं साधक की शारीरिक ऊर्जा को ऊर्ध्वगामी बनाती हैं और साधना के दौरान उत्पन्न होने वाली तीव्र शक्ति को शरीर में संचित करने और नियंत्रित करने में मदद करती हैं।
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