विस्तृत उत्तर
शाबर साधना में घण्टा पूजन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देवता का आगमन हो और बाधाएँ (राक्षस) दूर हों—'आगमार्थन्तु देवानां गमनार्थन्तु रक्षसाम्'। घृतदीप (ज्योति) पूजन में दीपक को कर्मसाक्षी माना जाता है और उससे साधना की समाप्ति तक स्थिर रहने की प्रार्थना की जाती है—'भो दीप देवीरूपस्तवं कर्मसाक्षी हूयविघ्नकृत यावत् कर्म समाप्ति स्यात् तावत् त्वं सुस्थिरो भव।' ये दोनों क्रियाएं साधना को सुरक्षित और निर्विघ्न बनाती हैं।





