श्रीमद्भागवतभागवत सप्ताह में द्वादशाक्षर मंत्र क्यों जपते हैं?कथा में विघ्न न हो, इस उद्देश्य से पाँच ब्राह्मणों को द्वादशाक्षर मंत्र द्वारा हरि-नाम जप करने के लिये रखा जाता है।#द्वादशाक्षर मंत्र#जप#विघ्न निवारण
श्रीमद्भागवतभागवत सप्ताह से पहले गणेश पूजा क्यों करें?कथा में विघ्न न आए, इसके लिये नित्यकर्म के बाद गणनाथ गणेशजी की पूजा करने को कहा गया है।#गणेश पूजा#विघ्न निवारण#भागवत सप्ताह
न्यास और ध्यान विधिन्यास क्या होता है और क्यों जरूरी है?न्यास से साधक का शरीर मंत्रमय और पवित्र होता है — इससे देवता की शक्तियाँ अंगों पर स्थापित होती हैं, विघ्न दूर रहते हैं और उग्र रूप के दर्शन नहीं होते।#न्यास#शरीर पवित्र#मंत्र स्थापन
शिव शाबर मंत्रशाबर पूजन क्रम में 'घण्टा पूजन' और 'दीप पूजन' क्यों किया जाता है?घण्टा पूजन देवताओं के आगमन और राक्षसों के गमन के लिए, तथा दीप पूजन कर्म की साक्षी के लिए होता है।#घण्टा पूजन#दीप पूजन#पूजन क्रम
दैनिक कर्मनया कार्य शुरू करने से पहले कौन सा मंत्र बोलेंनया कार्य शुरू करने से पहले: गणेश वन्दना — 'वक्रतुण्ड महाकाय... निर्विघ्नं कुरु मे देव'। बीज मंत्र: 'ॐ गं गणपतये नमः' (11/21 बार)। ज्ञान कार्य हेतु सरस्वती वन्दना। ऋग्वेद: 'ॐ गणानां त्वा गणपतिं हवामहे'। गणेश प्रथम पूज्य — सभी शुभ कार्य उनकी वन्दना से आरम्भ होते हैं।#शुभारम्भ#गणेश#विघ्न निवारण
स्वप्न शास्त्रसपने में गणेश जी दिखने का संकेत क्या?गणेश दर्शन = अत्यंत शुभ। विघ्न नाश, अटके काम पूरे, नई शुरुआत सफल। दूर्वा अर्पित = मनोकामना पूर्ति। मोदक खाते = धनलाभ। सुबह 'ॐ गं गणपतये नमः' जपें।#सपने में गणेश#स्वप्न फल#विघ्न निवारण