विस्तृत उत्तर
भागवत सप्ताह में द्वादशाक्षर मंत्र का जप विघ्न-निवारण से जोड़ा गया है। वक्ता पूजन और नियम-संकल्प के बाद कहा गया है कि कथा में बाधा न आए, इसके लिये पाँच ब्राह्मणों का वरण करना चाहिए। वे ब्राह्मण द्वादशाक्षर विद्या से हरि के नाम का जप करें। यहाँ जप कथा के साथ चलने वाली आध्यात्मिक सुरक्षा और साधना है। पहले गणेश पूजा से विघ्न-निवारण किया गया, फिर श्रीहरि स्थापना और श्रीकृष्ण पूजा हुई, फिर भागवत और वक्ता की पूजा हुई। उसी क्रम में पाँच ब्राह्मणों का मंत्र-जप सात दिन के आयोजन को स्थिर, पवित्र और भगवत्-केंद्रित बनाए रखने का साधन है।
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