विस्तृत उत्तर
न्यास साधना का वह प्रारंभिक चरण है, जिसके द्वारा साधक का शरीर मंत्रमय और पवित्र हो जाता है।
न्यास करने से देवता की शक्तियाँ साधक के शरीर के विभिन्न अंगों पर स्थापित होती हैं, जिससे:
- ▸साधना के दौरान आने वाले विघ्न-बाधा उत्पन्न करने वाली शक्तियाँ दूर रहती हैं
- ▸साधक को देवता के उग्र या भयंकर रूप के दर्शन नहीं होते





