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मंत्र जप विधि📜 मंत्र शास्त्र, तंत्र शास्त्र1 मिनट पठन

मंत्र जप में षडंग न्यास की विधि क्या है?

संक्षिप्त उत्तर

6 अंग: हृदय(नमः), शिर(स्वाहा), शिखा(वषट्), कवच(हुं), नेत्र(वौषट्), अस्त्र(फट्)। '[बीज] + अंग + suffix।' विनियोग बाद, जप पहले। अनुष्ठान = अनिवार्य।

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विस्तृत उत्तर

षडंग न्यास = शरीर के 6 अंगों पर मंत्र स्थापना:

6 अंग + मंत्र suffix

  1. 1हृदय: '[बीज] हृदयाय नमः' — दाहिना हाथ हृदय पर।
  2. 2मस्तक (शिर): '[बीज] शिरसे स्वाहा' — मस्तक स्पर्श।
  3. 3शिखा (चोटी): '[बीज] शिखायै वषट्' — शिखा स्पर्श।
  4. 4कवच (दोनों भुजा): '[बीज] कवचाय हुं' — दोनों कंधे cross।
  5. 5नेत्र (तीन): '[बीज] नेत्रत्रयाय वौषट्' — दोनों आंखें + भ्रूमध्य।
  6. 6अस्त्र (करतल): '[बीज] अस्त्राय फट्' — दोनों करतल ताली।

उदाहरण (शिव): 'ॐ नमः शिवाय हृदयाय नमः' → 'ॐ नमः शिवाय शिरसे स्वाहा'... आदि।

कब: जप आरंभ से पहले, विनियोग के बाद। अनुष्ठान = अनिवार्य। दैनिक = वैकल्पिक।

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शास्त्रीय स्रोत
मंत्र शास्त्र, तंत्र शास्त्र
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