विस्तृत उत्तर
मातृका न्यास = संस्कृत वर्णमाला (50 अक्षर) शरीर पर स्थापना:
क्या है: 50 अक्षर (अ→क्ष) = 50 शक्ति। प्रत्येक अक्षर शरीर के विशिष्ट अंग पर = शरीर मंत्रमय/शक्तिमय।
सरल विधि
- ▸16 स्वर (अ→अः) = मस्तक→मुख (ऊपर)।
- ▸34 व्यंजन (क→क्ष) = कंठ→पैर (नीचे)।
- ▸प्रत्येक अक्षर बोलें + संबंधित अंग स्पर्श।
कब: बीज मंत्र/तांत्रिक जप = अनिवार्य। सामान्य = वैकल्पिक।
अंतर्मातृका/बहिर्मातृका: अंतर = मन में। बहिर = शरीर पर स्पर्श।
सार: उन्नत विधि — गुरु मार्गदर्शन। सामान्य जप = करन्यास + अंगन्यास पर्याप्त।





