विस्तृत उत्तर
न्यास = मंत्र जप पूर्व शरीर के विभिन्न अंगों पर मंत्राक्षर स्थापित करना:
प्रकार
- 1करन्यास: हाथ की 5 अंगुलियों + करतल पर मंत्र बीज।
- 2अंगन्यास: 6 अंगों (हृदय, मस्तक, शिखा, कवच/भुजा, नेत्र, अस्त्र/करतल) पर।
- 3मातृका न्यास: संस्कृत वर्णमाला के अक्षर शरीर पर।
सरल करन्यास (उदाहरण — 'ॐ नमः शिवाय')
- ▸अंगूठा: 'ॐ' + स्पर्श
- ▸तर्जनी: 'न' + स्पर्श
- ▸मध्यमा: 'मः' + स्पर्श
- ▸अनामिका: 'शि' + स्पर्श
- ▸कनिष्ठिका: 'वा' + स्पर्श
- ▸करतल: 'य' + स्पर्श
उद्देश्य: शरीर = मंत्रमय। मंत्र शक्ति शरीर के प्रत्येक अंग में स्थापित।
सरल विकल्प: न्यास जटिल हो तो — 'ॐ' 3 बार जप + इष्ट देवता ध्यान = पर्याप्त (सामान्य जप)।





